कानपुर: कानपुर की किदवई नगर विधानसभा से भाजपा विधायक महेश त्रिवेदी ने वह कर दिखाया जो अब तक सिर्फ चाय की दुकानों और अंधेरे कमरों की गुपचुप चर्चाओं में होता आया था। पार्षद
उन्होंने कार्यकर्ताओं के एक कार्यक्रम में हंसी ठिठोली करते हुए 10% कमीशन की बात खुलेआम मान ली।
यूँ तो लगभग सभी इस कमीशन शब्द से परिचित हैं लेकिन लोग मानते थे कि कमीशन सिर्फ एक अलिखित परंपरा है, ठीक वैसे ही जैसे राजनीति में नैतिकता या चुनावी वादों का पालन। लेकिन विधायक जी ने सबको राहत दी- “हाँ भाई, कमीशन होता है!”
जहाँ आम जनता को यह सुनकर कोई खासा आश्चर्य नहीं हुआ, वहीं मीडिया जगत में ऐसा लगा कि जैसे भूकंप आ गया। राजनैतिक लोग हल्ला काटें समझ आता है लेकिन तमाम पत्रकार काहे लहालोट हो रहे हैं..ये समझ के बाहर है..?
पार्षद जैसी छोटी इकाई भी गिरफ्त में..
आप खुद सोचिये..
पार्षद का कमीशन नहीं होता क्या क्षेत्रीय कार्य में..?
सांसद कमीशन मुक्त रखते हैं क्या अपनी लोकसभा को..?
किदवई नगर के अलावा बाकी सारे विधायक सड़क/ निर्माण कार्य में कमीशन से ज्यादा गुणवत्ता देखते हैं क्या..?
थाने में कमीशन नहीं चलता क्या..?
डॉक्टर कमीशन पर नई दवा का प्रयोग नहीं करता क्या..?
ये सब छोड़िये, सामान्य आदमी खुद भी कमीशन पर जी रहा है देश में..कमीशन लोगों के खून में दौड़ता है..आपको अपने ही मिस्त्री से कोई दूसरी गाड़ी खरीदनी है तो उसे 2-3% कमीशन चाहिए..
आपको प्लॉट खरीदना है तो 2% कमीशन देना होगा..आपको किसी सरकारी विभाग में अपनी फाइल आगे बढ़वानी है तो बाबू की ऊपर वाली जेब में खर्चा पानी के नाम पर कुछ कमीशन डालना ही होगा..
तो कमीशन भरे इस माहौल में विधायक जी का खुलासा कोई ब्रह्मांडीय सत्य तो नहीं था, बल्कि “पब्लिक डोमेन का ओपन सीक्रेट” था।
अब देखा जाए तो जो बात मीडिया के जरिये सामने आनी चाहिए थी वो बात खुद विधायक जी बता रहे हैं और मेन स्ट्रीम मीडिया, सोशल मीडिया से वीडियो अपलोड कर कमीशन पर हुंआ हुंआ करे पड़ा है..
किसी एक कि हिम्मत नहीं है कि इस वीडियो के आगे बढ़कर सड़कों और अन्य निर्माण कार्य में कमीशन छोड़ उनकी गुणवत्ता का सच सामने ला सके..बाकी जनता का क्या वो तो हमेशा की तरह कंधे उचका कर चल देगी क्यों कि ‘कमीशन ही तो है, इसमें नया क्या है..!

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