पटना / बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए महागठबंधन में सीट शेयरिंग पर सहमति नहीं बन पाई है। इसी वजह से महागठबंधन के घटक दलों में बेचैनी बढ़ती जा रही है। खासकर कांग्रेस अब और इंतजार करने के मूड में नहीं है। पार्टी ने साफ संकेत दिए हैं कि अगर आरजेडी नेता और महागठबंधन की कोऑर्डिनेशन कमेटी के अध्यक्ष तेजस्वी यादव सीट बंटवारे को और टालते हैं, तो कांग्रेस अपने 30 उम्मीदवारों को प्रचार की अनुमति दे देगी।
इन 30 सीटों में 17 सीटें ऐसी हैं जहां कांग्रेस के मौजूदा विधायक हैं, जबकि 13 सीटें वह हैं जहां पार्टी उम्मीदवार 2020 में मामूली अंतर से हार गए थे।
महागठबंधन से अलग जा सकती है कांग्रेस ?
कांग्रेस अब और इंतजार करने के पक्ष में दिख नहीं रही। कांग्रेस नेताओं का सीधा कहना है कि महागठबंधन की कोऑर्डिनेशन कमेटी के अध्यक्ष व आरजेडी नेता तेजस्वी यादव अगर सीट बंटवारे का फैसला टालते रहे, तो पार्टी अपने 30 उम्मीदवारों को प्रचार शुरू करने की अनुमति दे देगी। इन सीटों में 17 कांग्रेस के मौजूदा विधायकों की हैं, जबकि 13 वे हैं जहां 2020 के चुनाव में उसके उम्मीदवार मामूली अंतर से हार गए थे।
नई दिल्ली में शुक्रवार देर रात कांग्रेस मुख्यालय में स्क्रीनिंग कमेटी की लंबी बैठक हुई। इस बैठक में संभावित उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा की गई और सभी मौजूदा विधायकों को फिर से टिकट देने का फैसला लिया गया। यानी 17 विधायकों का टिकट पक्का हो गया है। साथ ही 13 हार वाली सीटों पर भी प्रत्याशियों के नाम लगभग तय माने जा रहे हैं।
बैठक में उन कमजोर सीटों पर भी मंथन हुआ जहां कांग्रेस लगातार चुनाव हार रही है। सूत्रों के मुताबिक, औराई, चिरैया और मटिहानी जैसी सीटों को सहयोगी दलों के साथ अदला-बदली के विकल्प पर भी विचार किया गया।
बैठक में बिहार प्रदेश कांग्रेस चुनाव समिति के सुझावों को सामने रखा गया और सांसदों से राय ली गई। हालांकि कटिहार सांसद तारिक अनवर बैठक से अनुपस्थित रहे। उनकी गैरहाजिरी को नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन उन्होंने खुद इससे इनकार किया है।
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कांग्रेस की बैठक में तय किया गया कि भले ही उम्मीदवारों की अंतिम सूची केंद्रीय चुनाव समिति जारी करेगी, लेकिन मौजूदा विधायकों को अभी से प्रचार की अनुमति दी जाए।
Reporting- Team The Media Voice













