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शारदीय नवरात्रि 2025: जानें नौ देवियों को प्रसन्न करने वाले प्रिय फूल!

Sharadiya Navratri 2025: शारदीय नवरात्रि मां दुर्गा की आराधना का विशेष पर्व है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है और हर देवी को उनका प्रिय फूल अर्पित करने का महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि देवी माँ को उनका प्रिय फूल चढ़ाने से वो शीघ्र प्रसन्न होती हैं और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं।

Sharadiya Navratri 2025: इन नौ दिनों में किस देवी माँ को कौन से फूल अर्पित करने चाहिए..?

पहला दिन- माँ शैलपुत्री
मां शैलपुत्री को गुड़हल, सफेद कनेर और चमेली के फूल प्रिय हैं। इन्हें चढ़ाने से जीवन में सुख-शांति और स्थिरता आती है।

दूसरा दिन- माँ ब्रह्मचारिणी
इस दिन देवी माँ को कमल का फूल अर्पित करना शुभ माना गया है। ऐसा करने से ज्ञान और विवेक की प्राप्ति होती है।

तीसरा दिन- माँ चंद्रघंटा
मां चंद्रघंटा को कमल, बेला और चमेली का फूल अर्पित करें। इससे साहस और पराक्रम की शक्ति बढ़ती है।

चौथा दिन- माँ कूष्मांडा
देवी माँ को गुड़हल और पीले कनेर के फूल अर्पित करना श्रेष्ठ माना गया है। यह रोग-शोक दूर करने और आरोग्य प्रदान करने वाला माना जाता है।

पांचवा दिन- माँ स्कंदमाता
मां स्कंदमाता को कमल, गुड़हल और गुलाब के फूल प्रिय हैं। कमल का फूल चढ़ाने से संतान सुख और उनसे जुड़ी समस्याओं का समाधान होता है।

छठा दिन- माँ कात्यायनी
इस दिन गेंदा, कमल और गुड़हल के फूल अर्पित करने चाहिए। कहा जाता है कि माँ कात्यायनी विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करती हैं और मनचाहा जीवनसाथी मिलता है।

सातवां दिन- माँ कालरात्रि
मां कालरात्रि को रातरानी और गुड़हल के फूल चढ़ाना शुभ है। इससे भय, दुख और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है।

आठवां दिन- माँ महागौरी
माँ महागौरी को सफेद मोगरा, बेला और चमेली के फूल अर्पित करना उत्तम है। सफेद फूल मां महागौरी को अत्यंत प्रिय हैं और इन्हें चढ़ाने से पापों से मुक्ति मिलती है।

नौवां दिन- माँ सिद्धिदात्री
नवरात्रि के अंतिम दिन देवी माँ सिद्धिदात्री की पूजा कमल और चंपा के फूलों से की जाती है। इससे सभी सिद्धियों की प्राप्ति होती है और जीवन के हर कार्य में सफलता मिलती है।

देवी माँ को फूल अर्पित करते समय बरतें ये सावधानियां..

नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा में फूल अर्पित करना विशेष महत्व रखता है। लेकिन सही ढंग से अर्पण न करने पर पूजा का फल अधूरा भी रह सकता है। इसलिए इन बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है..

केवल ताजे और सुगंधित फूल ही चढ़ाएं, मुरझाए या बासी फूलों का उपयोग न करें।

फूल तोड़ने से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए।

अर्पण के समय मन में पूर्ण श्रद्धा और भक्ति होनी चाहिए।

यदि मनपसंद या विशेष फूल उपलब्ध न हों, तो गुड़हल का फूल अर्पित करना उत्तम माना गया है, क्योंकि यह माता रानी को अत्यंत प्रिय है।

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