प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को शिक्षा मित्रों के मानदेय में बढ़ोतरी को लेकर ठोस कदम उठाने का आदेश दिया है।
न्यायमूर्ति नीरज तिवारी की एकल पीठ ने वाराणसी के विवेकानंद की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा की ‘शिक्षामित्रों के सम्मानजनक मानदेय बढ़ाने के लिए रिट कोर्ट की ओर से दिए गए आदेश का पूर्ण अनुपालन करते हुए हलफनामा दाखिल किया जाए।’
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि यदि सरकार इस विषय पर जल्द निर्णय नहीं लेती है, तो बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव सहित को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होना पड़ेगा।
क्या है शिक्षा मित्रों के मानदेय से जुड़ा पूरा मामला ?
प्रदेश में लगभग 1.40 लाख कार्यरत शिक्षा मित्र 10,000₹ के मानदेय पर कार्यरत हैं और वो लंबे समय से कम मानदेय को लेकर असंतोष जता रहे हैं।
शिक्षामित्रों का कहना है कि वे स्कूलों में नियमित शिक्षकों जैसी ही जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें बेहद कम मानदेय दिया जा रहा है।
इस स्थिति से न सिर्फ उनका भविष्य असुरक्षित है बल्कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति पर भी गंभीर असर पड़ रहा है। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान साफ कहा कि राज्य सरकार शिक्षामित्रों के मानदेय में वृद्धि के लिए अब ठोस और सकारात्मक पहल करे।
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अदालत ने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो जिम्मेदार अधिकारियों को व्यक्तिगत तौर पर कोर्ट में हाजिर होना पड़ेगा। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद प्रदेश के शिक्षा मित्र उत्साहित हैं।
फिलहाल अदालत ने इस मामले को अगली सुनवाई तक स्थगित कर दिया है और साफ किया है कि सरकार को तब तक शिक्षामित्रों के मानदेय बढ़ाने के संबंध में ठोस निर्णय प्रस्तुत करना होगा।













