Cyber Fraud: इंटरनेट के युग में शायद ही कोई व्यक्ति हो जिसके पास मल्टीमीडिया फोन न हो और फोन है तो उसमें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म होना भी लाजिमी है।
आप व्हाट्सएप चला रहे हों औऱ अचानक आपके व्हाट्सअप में एक लिंक आता है और आप उस लिंक पर क्लिक कर देते हैं..
कुछ देर बाद ही आपके मोबाइल नम्बर पर आपके अकाउंट से रुपये कटने (withdraw) का मैसेज आता है,
तो आप सोचते हैं कि आपने तो अपने बैंक अकाउंट से कोई ट्रांजेक्शन नहीं किया फिर अकाउंट से रुपये निकलने का मैसेज क्यों और कैसे आ गया..?
पिछले दिनों कुछ ऐसा ही हुआ कानपुर चकेरी के एक प्रोपर्टी डीलर के साथ, जब साइबर ठगों ने उन्हें व्हाट्सएप पर एक एपीके (APK) फाइल का लिंक भेजा।
प्रोपर्टी डीलर ने लिंक को क्लिक किया और कुछ ही देर में उनके खाते से लगभग 2.28 लाख रुपये ठगों ने उड़ा दिए।
कैसे करते हैं साइबर ठग शिकार ?Cyber fraud
इंटरनेट के दौर में आपके व्हाट्सएप पर तमाम लिंक आते रहते हैं। साइबर अपराधी बस इसी बात का फायदा उठाते हैं।
वो आपके व्हाट्सएप पर या व्हाट्सएप ग्रुप में किसी अनजान नंबर से कोई एप्लीकेशन फाइल (APK) भेजते हैं।
यह फाइल दिखने में एकदम सामान्य लिंक या एप जैसी लगती है लेकिन इंस्टॉल होते ही मोबाइल में स्पाईवेयर एक्टिव हो जाता है। इसके जरिए ठग बैंकिंग ऐप्स और ओटीपी तक पहुंच बना लेते हैं।
कैसे बचा जा सकता है इस साइबर ठगी यानी ऑनलाइन फ्रॉड से ?
• किसी अनजान व्हाट्सएप ग्रुप या नंबर से आई किसी भी APK फाइल या लिंक्स को डाउनलोड न करें।
• सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किसी भी लिंक या फाइल पर क्लिक करने से पहले उसकी जांच जरूर करें।
• अपने मोबाइल में एंटीवायरस ऐप रखें और उसे समय-समय पर स्कैन करें।
• बैंक डिटेल और ओटीपी किसी से भी साझा न करें।
क्या कहते हैं सायबर एक्सपर्ट ?
तमाम साइबर एक्सपर्ट्स का कहना इंटरनेट के जमाने मे साइबर ठगी को पूरी तरह से रोक पाना मुश्किल है क्यों कि हर दिन ऑनलाइन ठगी के नए-नए तरीके सामने आ रहे हैं।
आपको पता ही नहीं है की खतरे में है आपका अपना बच्चा ?
इससे बचने का सबसे आसान तरीका आपकी सतर्कता है। जागरूक रह कर ही इससे बचा जा सकता है।













