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न कोई कैमरा, न कोई मंच..बस दिल से किया गया नेक काम ही इंसानियत की पहचान है!

रियल सोशल हीरो कभी भी कहीं भी देखने को मिल सकते हैं..और कुछ ऐसा ही वाक्या दिखा कानपुर के संजय वन (फ़ूड कोर्ट) में जब..

अचानक रोड़ के किनारे एक दंपत्ति पर नजर पड़ी जो स्कूटी से आये और सड़क किनारे बैठी एक गरीब दुखियारी बूढ़ी माता जी को खाने का पैकेट दिया..उसी दौरान उस बूढ़ी माता जी ने उनसे कुछ कहा तो वो सड़क से गुजर रहे ई रिक्शा रोकने लगे लेकिन दो तीन रिक्शा रुकने के बाद भी चले गए..

कुछ देर बाद वो दंपत्ति भी खाने का पैकेट बांटने के लिए आगे बढ़ गए..2 मिनट बाद मैं एक मित्र के साथ उन बूढ़ी माता जी के पास गया तो पता चला कि उनका कोई नहीं है और उन्हें बारादेवी तक जाना है तो सोचा कोई ई रिक्शा रोककर भेज देता हूँ..

लेकिन वहां कोई ई रिक्शा उस बूढ़ी माता जी को ले जाने के लिए राजी नहीं हुआ तो वापस आने लगा बाइक के पास की चौराहे से किसी को पकड़ता हूँ..

बाइक तक आया ही था कि स्कूटी पर वही दोनों पति पत्नी वापस बूढ़ी माता जी के पास आ गए और तभी नजर पड़ी की उनके पीछे एक पैर से खींचने वाला रिक्शा भी आया..और उन्होंने माता जी सड़क किनारे से उठा कर रिक्शा के बैठा कर गन्तव्य की ओर भेज दिया..

कानपुर के संजय वन में इस गुमनाम दंपत्ति ने सिखाया की इंसानियत के लिए कैमरा, क्लिक और सोशल मीडिया अपडेट से कहीं ज्यादा जरूरी आपके दिल मे इंसानियत का होना होता है..

फिलहाल दूर से चुपचाप फोटो क्लिक कीं.. और मन खुश हो गया की ऐसे तमाम रियल सोशल हीरो की वजह से ही तो समाज चल रहा है..है न..?
दिल से सलाम ऐसे दंपत्ति को..

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