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दुगने पैसों का वादा, बड़े जाल, ऑनलाइन ठगी का काला सच!

इंटरनेट आम जिंदगी को जितना मजेदार और आसान बनाता जा रहा है..उतना ही आम लोगों के लूटने का रास्ता भी आसान बनता जा रहा है। तमाम काम की साइटस के साथ ही मार्केट में पैसों को दुगना करने का लालच देने वाली वेबसाइट्स और एप की भरमार हो चुकी है। लोगों के मन में ज्यादा पैसों और चमकदार जिंदगी जीने के लालच का फायदा स्कैमर्स (Online Fraud) लगातार उठा रहे हैं।

हाल ही में ऑनलाइन ठगी का एक नया तरीका सामने आया है, जिसके जरिये आनलाइन स्कैमर्स ने देश भर में करीब 5000 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी कर डाली है। 1000 से 2000 रुपये वाली छोटी छोटी वेबसाइट्स के जरिये की जा रही इस ठगी में पूरी एक टीम काम करती है।

Online Fraud यानी पैसों को दुगना करने का खेल कहाँ से शुरू होता है ?

ऑनलाइन की जा रही इस ठगी की शुरुआत वेबसाइट पर ‘सवाल का जवाब दो, तुरंत पैसे अकांउट में लो’ कि तर्ज पर होती है। वेबसाइट्स पर शुरुआत में बेहद सरल से सवाल मसलन ‘ताजमहल किस शहर में है’ या कोई रंग पहचानने को बोला जाता है’.. अगर अपने सही उत्तर दिया तो आपके खाते में 50 से 150 रुपये तक कि धनराशि तुरंत ट्रांसफर कर दी जाती है और उसे आप हाथों हाथ विड्रॉ भी कर सकते हैं..और फिर यहीं से शुरू होता ठगों का Online Fraud का असली जाल..

कुछ प्रश्नोत्तर के बाद यूजर को गूगल, यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर रिव्यू देने के लिए बोला जाता है, जिसमें उन्हें 50₹ से 200₹ तक ऑफर दिया जाता है और ये रकम भी तुरंत विड्रॉ करने की छूट होती है। जब यूज़र 1000-1500₹ तक कमा लेते हैं और उन्हें विश्वास होने लगता है कि यह वेबसाइट असली है, तब शुरू होता है इन ऑनलाइन स्कैमर्स का दूसरा चरण यानी असली खेल।

स्कैमर्स का अगला पड़ाव-

अब ग्राहक को दूसरी क्रिप्टो ट्रेडिंग वेबसाइट पर शिफ्ट कर दिया जाता है। वहां एक ‘वीआईपी टाइप टेलीग्राम ग्रुप’ में जोड़ा जाता है..जहाँ हर मिनट फर्जी इन्वेस्टमेंट और प्रॉफिट के स्क्रीनशॉट शेयर किए जाते हैं। शुरुआत में सिर्फ 1000-1500₹ इन्वेस्ट करने को कहा जाता है और उसके बदले डेढ़ गुना या दोगुनी राशि वापिस भी दी जाती है। अगला इन्वेस्टमेंट 3000 से 5000 का होता है और फिर धीरे-धीरे नियमों के नाम पर 5000 से लेकर 25,000 और आगे 1 लाख तक की रकम इन्वेस्ट करवा ली जाती है।

स्कैम के पीछे छिपे मास्टरमाइंड इन स्कीमों का प्रचार तमाम छोटे से लेकर बड़े सोशल मीडिया इनफ्लूएंसर्स के माध्यम से करवाते हैं। 10 हजार फॉलोअर्स वाले से लेकर मिलियन फॉलोअर्स वाले तक इस स्कैम का हिस्सा बनते हैं..कुछ जानबूझकर तो कुछ अनजाने में। यहां तक कि कुछ प्रतिष्ठित मीडिया पेज भी इन वेबसाइट्स को प्रमोट कर चुके हैं।

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जल्दी अमीर बनने के लालच में फंस कर लोग लाखों की ठगी के बाद पुलिस के पास पहुँचते हैं, तो जांच उन्हीं बैंक खातों तक सीमित रह जाती है जिनमें ट्रांजैक्शन हुआ था। ये अकाउंट्स अक्सर किसी भोले-भाले व्यक्ति के होते हैं, जिन्हें कमीशन देकर इस्तेमाल किया गया होता है। असली अपराधी बड़ी चालाकी से कानून की पकड़ से बाहर रहते हैं और एक वेबसाइट से 2 करोड़ से लेकर 50 करोड़ तक की ठगी करके अगली वेबसाइट बना लेते हैं।

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